Saturday, February 9, 2013

लक्ष्य

लक्ष्य तक पहुँच कर ही रुक गये तो क्या दौड़े
अपने कदमों को थमने ना दो
तालियों के हक़दार वो नही जो सबसे तेज़ भागते हैं
बल्कि वो हैं जो मंज़िलों को पाते हैं

अंधेरी राहों पर अकेले दौड़े तो क्या दौड़े
राह में तुम्हारे साथ कोई तो हो
पर हमसफर का हाथ पकड़ के चलना भी तो कोई उप्लब्धि नही
साथ तो भागे पर राह में ही बिछड़ गये तो क्या दौड़े

मंज़िल पर पहुँच के सोचना क्या यही मेरी चाहत थी
धोखा खुद के साथ है और मंज़िल से भी
आईने में अक्स पूछेगा जवाब
इस धोखे के साथ राहों पर दौड़े तो क्या दौड़े

जीवन की राह पर भाग तो सभी लेते हैं
कुछ मंज़िल तक पहुँचते हैं और कुछ खो जाते हैं
तुम भी भागे थे सबके साथ उसी लक्ष्य की चाहत में
सब को पछाड़ कर भी थम गये तो क्या दौड़े

जीवन की राह में मंज़िलें और भी आएँगी
एक बार फिर कदम बढ़ाने को वो उकसाएँगी
गिर के उठना, उठ के गिरना किस्मत है तुम्हारी
पर मंज़िलों को हासिल करना तुम पर है

मंज़िलें तुम्हारा इंतज़ार करती हैं
तुम्हारे कदमों की आहटें वो बेसब्री से सुनती हैं
पर मंज़िलों के राह पर भागने वाले तुम अकेले नहीं
बेवजह प्यार में सब कुछ लुटाने वाले और भी हैं

जीवन फूलों का बिछौना नहीं है
राह में सैकड़ों रूकावट आती हैं
रुकावटें  क़िस्मत हैं तुम्हारी
पर उनको पार करना भी तो तुम पर है

इन्ही राहों पर चलना है तुम्हे
ज़ख़्मी पैरों से दर्द सहते हुए बढ़ना है तुम्हें
मंज़िलें करती हैं तुम्हारा इंतज़ार बाहें खोले हुए
इन्ही मंज़िलों को हासिल करना है तुम्हें...

Silhouette

A hazy silhouette in a drowning sun On a decrepit boat amidst roaring waves Hurt from storms and nostalgic winds For rushing to home, i...