लक्ष्य तक पहुँच कर ही रुक गये तो क्या दौड़े
अपने कदमों को थमने ना दो
तालियों के हक़दार वो नही जो सबसे तेज़ भागते हैं
बल्कि वो हैं जो मंज़िलों को पाते हैं
अंधेरी राहों पर अकेले दौड़े तो क्या दौड़े
राह में तुम्हारे साथ कोई तो हो
पर हमसफर का हाथ पकड़ के चलना भी तो कोई उप्लब्धि नही
साथ तो भागे पर राह में ही बिछड़ गये तो क्या दौड़े
मंज़िल पर पहुँच के सोचना क्या यही मेरी चाहत थी
धोखा खुद के साथ है और मंज़िल से भी
आईने में अक्स पूछेगा जवाब
इस धोखे के साथ राहों पर दौड़े तो क्या दौड़े
जीवन की राह पर भाग तो सभी लेते हैं
कुछ मंज़िल तक पहुँचते हैं और कुछ खो जाते हैं
तुम भी भागे थे सबके साथ उसी लक्ष्य की चाहत में
सब को पछाड़ कर भी थम गये तो क्या दौड़े
जीवन की राह में मंज़िलें और भी आएँगी
एक बार फिर कदम बढ़ाने को वो उकसाएँगी
गिर के उठना, उठ के गिरना किस्मत है तुम्हारी
पर मंज़िलों को हासिल करना तुम पर है
मंज़िलें तुम्हारा इंतज़ार करती हैं
तुम्हारे कदमों की आहटें वो बेसब्री से सुनती हैं
पर मंज़िलों के राह पर भागने वाले तुम अकेले नहीं
बेवजह प्यार में सब कुछ लुटाने वाले और भी हैं
मंज़िलें करती हैं तुम्हारा इंतज़ार बाहें खोले हुए
इन्ही मंज़िलों को हासिल करना है तुम्हें...
अपने कदमों को थमने ना दो
तालियों के हक़दार वो नही जो सबसे तेज़ भागते हैं
बल्कि वो हैं जो मंज़िलों को पाते हैं
राह में तुम्हारे साथ कोई तो हो
पर हमसफर का हाथ पकड़ के चलना भी तो कोई उप्लब्धि नही
साथ तो भागे पर राह में ही बिछड़ गये तो क्या दौड़े
धोखा खुद के साथ है और मंज़िल से भी
आईने में अक्स पूछेगा जवाब
इस धोखे के साथ राहों पर दौड़े तो क्या दौड़े
जीवन की राह पर भाग तो सभी लेते हैं
कुछ मंज़िल तक पहुँचते हैं और कुछ खो जाते हैं
तुम भी भागे थे सबके साथ उसी लक्ष्य की चाहत में
सब को पछाड़ कर भी थम गये तो क्या दौड़े
एक बार फिर कदम बढ़ाने को वो उकसाएँगी
गिर के उठना, उठ के गिरना किस्मत है तुम्हारी
पर मंज़िलों को हासिल करना तुम पर है
मंज़िलें तुम्हारा इंतज़ार करती हैं
तुम्हारे कदमों की आहटें वो बेसब्री से सुनती हैं
पर मंज़िलों के राह पर भागने वाले तुम अकेले नहीं
बेवजह प्यार में सब कुछ लुटाने वाले और भी हैं
जीवन फूलों का बिछौना नहीं है
राह में सैकड़ों रूकावट आती हैं
रुकावटें क़िस्मत हैं तुम्हारी
पर उनको पार करना भी तो तुम पर है
राह में सैकड़ों रूकावट आती हैं
रुकावटें क़िस्मत हैं तुम्हारी
पर उनको पार करना भी तो तुम पर है
इन्ही राहों पर चलना है तुम्हे
ज़ख़्मी पैरों से दर्द सहते हुए बढ़ना है तुम्हेंमंज़िलें करती हैं तुम्हारा इंतज़ार बाहें खोले हुए
इन्ही मंज़िलों को हासिल करना है तुम्हें...